कविता नारक्या दाजी के साथ ************************* मटमैली फतोही – बाण्डी में गोल थिगली जैसे कि छप्पर के सुराखों से टपकता किरनों का चन्दूकला ऐसे उजास थे मेरे गांव के नारक्या …
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March 2025
लोहा पीटों के डेरे **************** ( ४ ) अब नहीं हैं चिन्ता डेरों को लम्बरदार की कि जिसने पुराने अनाज के बदले पटका लिए थे पहली खेप के तमाम नये …
लोहा पीटों के डेरे *************** ( ३ ) लोहा पीटों को चिन्ता है पूरे गांव की और पूरा मेहनती गांव आकर्षित है डेरों की तरफ जिसके जीवन की जंग को …
लोहा पीटों के डेरे ************** ( २ ) अब लोहापीटे निकले हैं पहली खेप के औजार लादे यह वक्त लुहारिन का मां होने का होता है जिसमें वह —– पिलाती …
लोहा पीटों के डेरे ************** ( १ ) लोहा पीटों के डेरे लग गये बस्ती के बाहर लोग खुश हैं कि अब दादा परदादाओं के जंगल लगे हथियार ढलेंगे हंसियों …
जमना बेड़नी और बिहारी ढोलकिया ****************************** ( ५ ) धरम धारियों की धवल धोतियां कमर से छिटक कर नंगेपन का परचम फहरातीं नाचते गाते एक मौका ऐसा भी आता कि …
जमना बेड़नी और बिहारी ढोलकिया ****************************** ( ५ ) धरम धारियों की धवल धोतियां कमर से छिटक कर नंगेपन का परचम फहरातीं नाचते गाते एक मौका ऐसा भी आता कि …
जमना बेड़नी और बिहारी ढोलकिया ****************************** ( ४ ) मुझे किसी का डर नहीं मैं किसी की सुबह -शाम किसी की दोपहर नहीं अच्छे – अच्छे मेरे पास खुजली लिए …
