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July 2025

आकार लेती यात्राएं **************** ( ३ / १ ) धूप और धरती की आंच से भट्टे पड़े सख्त पांव सफेद झक्क यात्रा के लिए जाने कब से चल रहे हैं …

आकार लेती यात्राएं ***************** ( २ ) खटिया पर लेटी दादी मां शाम होते ही आंगन में अपने नाती पोतों से हाथ – पांव दबवाती सुना रही कहानी – – …

आकार लेती यात्राएं **************** ( १ ) करीने से सजते जाते जूतों की कतारों से सुरक्षित चरण कमलों में और चर्र – चर्र मुरादें छोड़ते उनके नंगे पांवों में कितना …

अनंत को लेकर ************** ( ८ ) मुझे ,कुछ भी नहीं चाहिए न सफेद खरगोश न काली बिल्ली न भूरा हाथी –न और कुछ मुझे तो सिर्फ तुम्हारी वह नदी …

अनंत को लेकर ************* ( ७ ) खेल ,जो तुम खेल रहे वह मेरे भीतर भी हो रहा तुम्हारी उछल – कूद के निशान मेरी क्रीड़ा- स्थली पर अंकित हैं …

अनंत को लेकर ************* ( ५ ) मैंने जो फूल तुम्हारे लिए तोड़े थे उनकी महक मेरी हथेलियों के हर रंध्र में समाई है अब तुम्हारी वेणी और मेरी हथेलियां …

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