Home आज की कविताऐसे में कैसे

ऐसे में कैसे

by Dr. Vinita Raghuvanshi
ऐसे में कैसे
**********
जुबानों पर कुण्डियाँ लगी है
दस्तकें तक डूब जाती
इस महाचुप्पी में
ऐसे में कोई भी
कैसे गा सकता कोई छन्द
क्योंकि जब जुबानें बन्द हो जाती हैं
तो कान -नाक -आँख
सभी हो जाते बन्द
सबके सब पटक दिये जाते
इस महाचुप्पी में
मैंने यहीं से अपने आपको
टटोलना शुरु किया है ठीक से ।
(श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह ” तुम पूरी पृथ्वी हो कविता ” से उद्धृत )

You may also like

Leave a Comment

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More