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आकार लेती यात्राएं

अनंत को लेकर ************** ( ८ ) मुझे ,कुछ भी नहीं चाहिए न सफेद खरगोश न काली बिल्ली न भूरा हाथी –न और कुछ मुझे तो सिर्फ तुम्हारी वह नदी …

अनंत को लेकर ************* ( ७ ) खेल ,जो तुम खेल रहे वह मेरे भीतर भी हो रहा तुम्हारी उछल – कूद के निशान मेरी क्रीड़ा- स्थली पर अंकित हैं …

अनंत को लेकर ************* ( ५ ) मैंने जो फूल तुम्हारे लिए तोड़े थे उनकी महक मेरी हथेलियों के हर रंध्र में समाई है अब तुम्हारी वेणी और मेरी हथेलियां …

अनंत को लेकर ************** ( २ ) अपने चमचमाते सूरज और बन्द तहखाने एक साथ फैला दिये तुम्हारे सामने लेकिन तुम — दांतों से नाखून कुतरते दूर उस पहाड़ी पर …

अनंत को लेकर ************* ( १ ) तुम्हारे पास वह सब है जिसका तुम्हें अन्दाज तो होना ही चाहिए एक बहुत बहुत गहरा जलाशय तुम्हारी आंखों में समाना चाहता उसे …

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