तलघर में ********* ( २ ) महात्मा गांधी की मूर्ति के ठीक सामने पहुंचते हम किस्सा खत्म करते हुए वह मुझे कुछ दूर रख कर अहिंसा के देवता के कल्याणकारी …
आकार लेती यात्राएं
तलघर में ******** (१ ) मुझे अक्सर –उसके घर के सामने से ही आना – जाना पड़ता है हर बार वह रोम – रोम से मुस्कुराते हुए — करता दण्डवत …
जूता : अलग अलग सन्दर्भ ************************ ( ४ ) सूरज को गलबहियां डाले उसके खीसें से चबेना निकाल दड़दडाते खिलखिलाते चहलकदमियां करते आदमी के बारे में —- तुमने कभी सोचा …
जूता : अलग – अलग संदर्भ ************************* ( ३ ) प्रकृति के पास नहीं है पादुकाएं हरिण तोते मोर मैं ना कौन से जूते पहनते ? बाज़ का सर्र – …
जूता : अलग – अलग संदर्भ ************************* ( २ ) जूतों के अलग – अलग नम्बर हैं नम्बर एक का जूता एकदम धवल और आकर्षक लगता खादी के मोजे पहनें …
जूता : अलग – अलग संदर्भ *********************** ( १ ) जारी है खरीद – फरोख्त जूतों की दुकान पर फर्मे पर चढ़े जीभ निकालें मशीनों की सूलियों पर झूलते सूजों …
गंध – वृक्ष ********* जो पौधा पिछले दिनों रोपा था अब उसकी शाखें बाहों – सी लम्बी हो गई हैं जाता हूं जब भी करीब ठीक उसी मुद्रा में समेटना …
नन्दी ******* एकाएक चौराहे पर ठहर कर उसने सुरों को ठप्कारा खट्ट ऽ ऽ ऽ खट्ट ऽ ऽ ऽ और डांटते हुए ओक् – खां ओक् –खां झटकारता है मिट्टी …
