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विनीता रघुवंशी
आधार
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जो राजनीति से देश चलाये
मैं साथ हूं उनके
वहां तो कतई नहीं
जो नागरिकों को अपाहिज कर
बैसाखियां पकड़ाते हैं
और गाते हैं ——
शस्य श्यामला के गीत जोर शोर से
चलने चलाने और गाने में
जिसका एकाकार होता है
वही नेता देश का आधार होता है ।
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —– ” आंगन बुहारते वक्त ” से उद्धृत )
आज की कविता में राज और उसके भीतर पैठी नीति और नीति के जनाधार से जुड़ा नेता ही असल राजनेता होता है ।हम जनता हैं और हर राजनैतिक गतिविधियों के परिणामों को सहते, सहमते ,और सहमत होकर उसके पीछे चलते हैं । लोकतंत्र में हमारी उपस्थिति बस इतनी भर होती है कि हम मतदान करते हैं और हर हमेशा मतदाता बने रहते हैं ।फिर हमारे मत को चाहे जैसे लुभावनी बातों से ,आश्वासनों से , जुमलों से ,बहकाते नारों से या कीमत अदा करके हासिल कर लिया जाये ।यह हर नागरिक को सोचना विचारना चाहिए कि उसके देश का नेतृत्व किस प्रकार के नेताओं के हाथ में संचालित है ।जो स्वयं कानून तोड़ कर ,नीति विरुद्ध आचरण करके नेतृत्व का सूत्र अपने हाथों में सम्भाल रहा है उस नेतृत्व को जनता को तिरस्कृत और अस्वीकार करना चाहिए ।राज काज में नीति और न्याय सदा परिलक्षित होनी चाहिए ।यह परखने का काम नागरिकों का है ।हर बलशाली के पिछलग्गू बन कर जीवन खोजती हुई जनता पूर्णतः अपाहिज होती है । वह प्रलोभन की बैसाखियां पकड़े अपनी वैचारिक पहल के साथ तन कर खड़ी नहीं हो सकती । असल नेता वही है जो नैतिक मूल्यों के साथ जनता के हर दुःख सुख में ,दर्द,तनाव, यातना, कष्ट ,संघर्ष में सदा साथ खड़ा रहे ।वह अधिकार सम्पन्न होते ही देश का मालिक ,देश का भाग्य विधाता या केवल दर्शक भर बनकर जनता को अपनी सजावट की वस्तु की तरह इस्तेमाल न करे। देश की भौगोलिक , सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सभी सत्ताओं को केवल अपने निजी स्वार्थ और हित के लिए इस्तेमाल करे तो समझ लीजिए वह देश को चला रहा है याने वह देश को भरमा रहा है ।वह नीति विरुद्ध देश के साथ हरकत कर रहा है ।जनता की सुविधाओं का नहीं बल्कि झूठी बहसें ,झूठे संवेदना भरे जुमले , झूठे वादे और खोखले वचन देकर जनता को आपस में भिड़ा देना ।यह देश चलाना नहीं वरन देश के साथ अपने हर स्पन्दन को महसूस करने वाला नेता ही जन नेता होता है ।जो देश की सत्ता को हासिल करके राजसी ठाठ -बाट और शानो-शौकत के लिए राजकोष को अपने सुख सुविधा के लिए व्यय करें वह सच्चा नेता नहीं है ।उसके द्वारा की जाती राजनीति भी नैतिक जिम्मेदारी से भरी नहीं है ।वह सत्ता का निजी जीवन में घालमेल कर रहा है ।राजकोष और संविधान को अपने निजी स्वार्थ के लिए उपभोग की चीज मान रहा है ।धर्म और जाति को उसने समाज में अशान्ति और उत्पात मचाने के साधन बना लिया हो । जहां देश की जनता ,मजदूर ,युवा , महिलाएं,किसान सब त्राहि माम त्राहिमाम पुकार रही हो और सूचना संचार के तमाम संसाधन सुख और शांति के झूठे प्रचार करके लोकतंत्र को छल रही हो वहां यह भ्रम फैलाया जाये कि देश चल रहा है ? क्या एक सुचिन्तक नागरिक समाज इसे देश की गतिशील अवस्था मान सकता है ?
जिस राजनेता और नेतृत्व में राजनीति के मानमूल्य का ज्ञान नहीं वह नेता केवल देश को अपाहिज , विकलांग ,रीढ़ विहीन बनाकर ही रख छोड़ेगा ।वह कभी भी नागरिक चेतना सजगता का सम्मान नहीं करेगा । लेकिन जो नेता राज काज में नीति , संविधान,कानून ,न्याय -व्यवस्था ,को सुदृढ़ बनायेगा वही नेता जनता के नेतृत्व के लिए असली और खरा नेता है ।जनता के भरोसे और यकीन का आधार उसे ही मिला है ।जनता को ऐसी नीति नियम पर चलने वाली राजनीति का ही पक्षधर होना चाहिए ।झूठी राष्ट्र भक्ति और पाखंड भरा देशप्रेम किसी मायने में जनता के लिए हितकारी नहीं है ।देश के बहुत से हिस्से जल रहे हैं और संसद असुरक्षित है ।,सांसद- विधायक बाजार में बिकने को खड़े हैं तो यह राजनीति का कौन सा बहुमूल्य चेहरा है । वर्तमान समय में तो संवैधानिक सभी स्वरुपों को राजनीति ने विरुप कर दिया है ।सभी संस्थानिक स्वायत स्थितियों पर सत्ता ने अपना नियंत्रण कर लिया है ।आज राजनीति भय-दोहन में महारत हासिल कर रही है । देश की यह अवस्था में नागरिकों को अपने जन नायक का असल ज्ञान होना बहुत जरुरी है ।नीति पर चलने वाले और जनता के बीच में खड़े नेता को ही अपना जन नायक का आधार देना चाहिए ।राजनीति में नैतिक मूल्य और ईमानदारी होना बेहद जरुरी है ।यह चयन ही वास्तव में असल चुनाव और लोकतंत्र की असल स्थापना है ।हम सब नागरिक हैं यही चेतना हमें सजग , सचेत, और सक्रिय बनायेगी । अपने भीतर के नागरिक को जगायें और सच्ची देशभक्ति को प्रकट करिये ।
