दृष्टांत होने को ************* मैंने उन्हें न तो पत्तलों में घास की रोटियां खाते देखा ना निखरनी जमीन पर सोते वे तो इनकी बातें भर करते रहे और हमें दृष्टांत …
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December 2023
नेलकटर फेंककर ************** छोटा सा नेलकटर एक पूरी संस्कृति है जिसके दायरे में बनते रहते हैं जानवर से आदमी आदमी बनने के चक्कर में हम नाखून काटते रहे और इसी …
चुपचाप ******** मेरे सपने में गांधी जी आये और रात भर चिन्तातुर दशा में बैठे रहे चुपचाप सुबह उठते ही लगा कि अब तो दिन- ब-दिन हमारे भी चुप रहने …
कद को ही ********** धीरे धीरे फटती रही चादर और हम जीवन भर अपने कद को ही करते रहे उसी के बराबर धीरे -धीरे । ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी …
पत्थरों से रिसती कविताएं ********************* पृथ्वी में समाते ही ढाल लेंगी शिलाएं उन्हें अपने भीतर हजारों हजार साल बाद हू-ब-हू अक्सों का इतिहास छिपाये मिलेंगे फाॅसिल्स क्या तब भी इसी …
अग्निमुख ********* रजकण से लेकर चट्टान बनने तक की प्रक्रिया में तुमने —- आग को हमेशा -हमेशा अपनी छाती में छुपाये रखा चट्टानों ! कब तक और दोगी सृष्टिक्रम की …
अग्निमुख *** रजकण से लेकर चट्टान बनने तक की प्रक्रिया में तुमने —- आग को हमेशा -हमेशा अपनी छाती में छुपाये रखा चट्टानों ! कब तक और दोगी सृष्टिक्रम की …
स्वाधीन भाव से ************* वह अनुशासन में जकड़ा घृणा करना सीख गया और मैं स्वाधीन होकर किये जा रहा प्रेम सभी से । ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता …
