ठीक पहचान के लिए ****************** पानी जब सदियों से ठण्डा पड़ा हो तो – – – उसे खौलाना जरुरी हो जाता है वह बादल ,बिजली, आकाश से गुजरकर खुद को …
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January 2024
खोज ***** खोज रहा गालियों में छिपी प्यार की भाषा भटक रहा हिंसक इरादों में समाई अहिंसा की छांव पाने और तलाश रहा उस आग को जो बुझे चूल्हे चेताना …
सैलानियों के लिए *************** पहाड़ की शक्ल में सिवान तक आ पहुंचा है तानाशाह उसकी भौंहों पर झुके हैं बादल पलकों पर खेल रही शबनम कलाइयों पर लिपटी है नदियां …
स्मृति में खोज ************ वर्तमान के पास नहीं होता काम -धाम कांटे नहीं कटता वक्त तब वह —- गड़े इतिहास को घसीटकर बाहर लाने का काम शुरु कर देता और …
मूलमंत्र ******* अच्छा किया वोट देने का अधिकार दिया किन्तु यह तो बताओ लोकतंत्र को समझकर समझाने का मूलमंत्र कब दोगे ? ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह …
अनुभव ****** तुमने कभी पहाड़ को छेड़कर देखा है वह प्रलय के बादलों जैसा गड़गड़ाता है चट्टानों को झकझोरा है वे शेरनी की तरह गुर्राती है पत्थरों से बोले हो …
सुप्रभात नूतन वर्षाभिनंदन संकल्प —-१ एक लपलपाता खंजर मेरे माथे पर लटका है जहां भी नजरें दौड़ाता हूं वहां अपने उन्नत – अनंत माथे पर झूलते खंजर ही खंजर दिखाई …
