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विनीता रघुवंशी
स्मृति में खोज
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वर्तमान के पास
नहीं होता काम -धाम
कांटे नहीं कटता वक्त
तब वह —-
गड़े इतिहास को घसीटकर
बाहर लाने का काम शुरु कर देता
और पास बैठे पिता को भी
लगा देता इसी में
और चिथड़ा -चिथड़ा
स्मृति में खोजते रहते
पिता भी —-
अपने पिता का इतिहास ।
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —–” आंगन बुहारते वक्त ” से उद्धृत )
आज की कविता मनुष्य के जीवन की भरपूर कोशिश का वह सिलसिला है जिसमें वह कर्म शील रहते हुए अपने जीवन को गुजारता है ।आदमी अपने मानवीय अस्तित्व को सदा किसी न किसी काम में लगना लगा कर अपना जीवन काटता है ।इस जीवन की यात्रा के दौरान उसके पास ज्ञान ,अनुभव,विचार , धारणाएं ,हुनर , वैशिष्ट्य,विशेषज्ञता ,आदि संकलित होते जाते हैं ।इस संचित ज्ञान और अनुभव को ही वह अपने जीवन को व्यतीत करने के लिए उपयोग करता है ।जीवन का कुल जमा जोड़ केवल स्मृतियां ही नहीं होती ,जीवन को हर बार अपने तीनों कालों से आमना – सामना करना होता है भूत हमें सजग करता है पुरानी गलतियों ,भूलों ,विचारों को छोड़कर अपने आचरण में शुद्धि संशोधन,या सुधार की जरुरत हो तो वह गत के बल भरोसे अपना आगत अर्थात वर्तमान स्थिति,सोच को बदल सकता है ।दूसरा काल अर्थात भविष्य इसके बारे में आदमी के मन में हर समय जिज्ञासा बनी रहती है ।आने वाले कल में क्या होगा ? कल कैसा होगा ? कल की चिन्ता में वह अपने वर्तमान पर पकड़ को ढीला छोड़ देता है ।इसी वजह से जो परिणाम उसे वर्तमान से सही सही मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता।इस तरह आदमी के हाथ से वर्तमान और भविष्य दोनों फिसल जाते हैं ।वह पूरे समय में अतीत की खुशफहमियों में डूबा रहता है और वर्तमान के बारे में कोई ठोस रुपरेखा नही बनाता वरन यह सोचता है कि अतीत अच्छा है तो वर्तमान भी अच्छा ही रहेगा ।यह आदमी की ग़लत फहमी ही होती है ।आदमी को हर हमेशा सजग और सचेत रहना चाहिए ।अतीत बहुत स्वर्णिम भी रहा हो तब भी वर्तमान के वैचारिक निर्णय ही उसके भविष्य को संवारने में बेहतर परिणाम दे सकते हैं ।आदमी पूरे जीवन भर अतीत चिन्तन के सहारे जीवन नहीं काट सकता ।अतीत की भूलों ,गलतियों ,आक्रमणों ,हमलों ,दासता के किस्सों ,कबीलों जातियों के संघर्ष के इतिहास को आधार बनाकर आज की पीढ़ियों के जीवन ,विचार ,और बदलों की मानसिकता बना कर उन्हें अन्धकार में नहीं धकेला जा सकता है ।हम कब कब किसके गुलाम बनाये गये ,किस किसने हम पर हमला किया और हमारी संस्कृति और सभ्यता को नुक्सान पहुंचाया ,यह सब पीढ़ियों को सजग ,सचेत ,और सावधान करने के लिए तो पढ़ाया ,समझाया जा सकता है ।संस्कृति का सही मायना बतलाया जा सकता है लेकिन विगत के इतिहास का बदला लेने के लिए आज की पीढ़ियों को इसमें झौंक देना बहुत बड़ी नासमझी ही होगी ? वर्तमान इसीलिए नष्ट नहीं किया जा सकता । वर्तमान अर्थात आज हर समय अतीत के सामाजिक राजनीतिक आर्थिक धार्मिक हमलों के लिए कुर्बान नहीं किया जा सकता । वर्तमान का सही उपयोग तो हर समय अपने आगत को बेहतर बनाने वाली कार्य योजना ,रुपरेखा के सपने बुनने के लिए किया जाना चाहिए ।आज का नौनिहाल कल का भविष्य होता है और यदि उसे केवल अतीत को ही खोदने का काम सौंप दिया जाये तो यह देश के भविष्य को अन्धकार मय बनाने की ही दिशा होगी ।जीवन में आनंद और सरसता, समरसता बनाये रखने के लिए अतीत की स्मृतियां बहुत ही कारगर होती है लेकिन हर समय अतीत का विमर्श करते रहना पीढ़ियों के साथ सबसे बड़ा छल है ।इस छल को समझना समाज, जनता के लिए बेहद जरुरी है ।इतिहास के सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक, धार्मिक आक्रमणों ,हमलों का प्रतिशोध और बदला लेने के लिए उकसाना ,गलत इतिहास का महिमा मंडन करना यह सब आज की पीढ़ियों को भ्रमित और बहकाने के लिए किया जा रहा है ।इसे युवा पीढ़ी को समझना होगा । आदमी के लिए हर काल हर समय सरकता जाता है पीढ़ियां और लोग बदलते जाते हैं , भौगोलिक , राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक अवस्थाएं हर हमेशा परिवर्तित होती जाती है । इसलिए इतिहास का केवल अध्ययन किया जाना चाहिए यह सबक है वर्तमान हालात से बाहर का समय ।आज हर बार आज है हर फैसला वर्तमान को सम्मुख रख कर किया जाना चाहिए । मनुष्य के जीवन में हर काल का महत्व है लेकिन वर्तमान ज्यादा असरकारक होता है ।पीढ़ियों को भी आज में ही सांस लेना चाहिए गुजरे पर विचार हो और भविष्य पर निगाह टिकी रहे । यहीं जीवन का सही दृष्टिकोण होता है ।विचार ही वर्तमान है ।रुढ़ियों को अन्धविश्वास पर प्रबल प्रहार करना ही विचार है ।
