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सूरज -तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

by Dr. Vinita Raghuvanshi
सूरज
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( ३ )
अब तो सूरज
मेरे जन्मदिन पर
गरमागरम बधाइयां देना भी भूल गया
बहुत समझदार हो गया
मेरा बाल सखा !
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —-” तुम पूरी पृथ्वी हो कविता ” से उद्धृत )
आज की कविता में बचपन के दोस्तों में आती दूरियां और मित्रता में औपचारिक शैली का आ जाना सुखद स्थिति नहीं मानी जा सकती ।सूरज की उपस्थिति उसकी गर्मी आदमी के पैदा होते ही जरुरी होती है ।सूरज विटामिन – डी का अच्छा स्रोत माना जाता है । इसलिए जन्म के साथ ही बच्चों को धूप में थोड़ी देर रखा जाता है ।विशेषकर सर्दियों में पूस माघ के महिनों में इससे कहा जाता है कि धूप से पाचन क्रिया ठीक होती है । सूरज का मनुष्य के साथ सख्य भाव ही है । जब सूरज पर ग्रहण की छाया होती है तब वैज्ञानिक यह मानते हैं कि जो भी खाद्य पदार्थ होते हैं उनमें उस समय विकिरण होता है और विषाणु पैदा हो जाते हैं इसीलिए ग्रहण के दौरान खाने – पीने की मनाही रहती है और खाद्य सामग्री को ढक कर रखा जाता है ।यह है जीवन से जुड़े सूरज की रोशनी का महत्व ।यदि सूरज नहीं ,धूप नहीं तो निरोगी काया भी नहीं ।सूरज का तपना प्राणीमात्र के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है ।उसके जन्मदिन की बधाइयों से जुड़ा हुआ है ।आज की भवन निर्माण शैली पर यदि विचार किया जाए तो यह प्राय: देखने में आता है कि बहुमंजिला इमारतों में सभी प्रकार की सुविधा का ख्याल रखा जाता है लेकिन धूप की और प्राकृतिक रोशनी का ध्यान नहीं रखा जाता ।जो सूरज बचपन से मनुष्य का खास सखा है वही जब अपना मिजाज बदल लें तो मनुष्य का चिन्तित होना तो स्वाभाविक ही है । इसीलिए तो बाल सखा की समझदारी भी विचारणीय हो गई है ।जो सूरज सुबह से धरती को स्पर्श करते हुए माथे पर चढ़ आता था उसका इस तरह जीवन से दूर होना सवाल तो खड़े करेगा ।यह सब आज वर्तमान आधुनिक जीवन शैली और भवन निर्माण कला का तरीका है ।जिसने मनुष्य के जीवन से चांद सूरज हवा धूप रोशनी के प्राकृतिक साधन दूर कर दिये । मनुष्य कृत्रिम जीवन शैली बनावटी हवा ,पानी,गर्मी ,सरदी के भरोसे अपने को जीवित समझे हुए हैं ? हमारे पास ठण्डक के लिए ए सी ,कूलर ,पंखे है तो धूप ,गर्मी के लिए हीटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक संसाधन हैं ।जब सब कृत्रिम है तो फिर प्रकृति के उपादानों का ,उपहारों की क्या अहमियत ? बाल सखा सूरज को भी समझ में आ गया कि दोस्त को ‘मित्र ‘ की कोई जरुरत नही ।सूरज के असंख्य नामों में ‘मित्र’ का भी उल्लेख मिलता है ।सूरज आदमी का जन्मजात मित्र है । प्रकृति तो मनुष्य की मित्र है ही । 🙏विनीता रघुवंशी

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