Home आज की कवितासूरज-तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

सूरज-तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

by Dr. Vinita Raghuvanshi
सूरज
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( ६ )
सूरज इतना घिरा रहता
बादलों से कि जब भी
जाता उसके पास की खुद भी
डूब जाता धुंध में
जिस दिन
रोशनी का पेड़ होगा सूरज
उस दिन किलकारियां मारता
पहूंचुगा उसकी छांव तले ।
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —–“ तुम पूरी पृथ्वी हो कविता ” से उद्धृत )
आज वर्तमान समय में प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि सूरज की निरभ्र धूप धरती तक पहुंच ही नहीं पाती है ।सूरज धुंध में खोया आभाहीन एक पिण्ड समान आसमान में चमकता रहता है ।हमने अपने स्वार्थों के भीतर रच बस कर प्रकृति के समस्त मानव हितेशी उपादानों को प्रभाव हीन कर दिया है । न हमारे पास धरती अपने मूल स्वरुप में बची है न आसमान ही हमारे पास बचा है हमने नदियों की निर्मलता को मलिन कर दिया सागर की गहराई और पानी दोनों रसायनिक प्रदूषण से भरपूर है बची हवा तो वह भी स्वच्छ नहीं है उसमें भी कार्बाइन डाई आक्साइड घुला मिला है ।यह है धरती पर मनुष्य के जीवन का दुष्चक्र जिसमें मनुष्य जीवन की तलाश करने को झूझता रहता है । क्या मनुष्य को अपनी सेहत के लिए चिन्तित नहीं रहना चाहिए ।क्या उसमें जीवन की दीर्घता की कोई कामना शेष नहीं ? या वह परिस्थितियों का दास बनकर और निरुपाय होकर अपना जीवन गंवाने को तैयार हैं ? मनुष्य के लिए सबसे पहला और प्राथमिक रुप से यदि कोई सवाल है तो वह है सेहत का ? अपने स्वास्थ्य का ? लेकिन मनुष्य अपनी भौतिक उन्नति, सम्पत्ति-सम्पदा जोड़ने में इतना खोया हुआ कि उसने अपनी सेहत,स्वास्थ्य को भी दरकिनार कर दिया यह भूल गया कि यदि दौलत होगी भी और वह नहीं होगा तो यह किया गया परिश्रम तो सब व्यर्थ ही है ? इसके वैसे नतीजे तो उसे मिलने से रहे जैसे कि उसने कल्पना की और मंसूबे बनाए । मनुष्य का धनार्जन के साथ – साथ ही स्वास्थ्य अर्जन पर भी ध्यान रखना चाहिए ।यह बेहद बुरी बात है कि मनुष्य ही मनुष्य के लालच,लोभ ,और स्वार्थ का शिकार बनता रहे ।समस्त प्रदूषण मनुष्य की स्वार्थ वृत्ति का ही परिणाम है । अनदेखी भी मनुष्य की ही है जिसमें उसके पास बेहतर होना ही धन – सम्पत्ति जोड़ कर है भले ही सेहत को चूना लग जाए ।धरती आकाश पहाड़ नदियों सागर हवा सब प्रदूषित होते रहें पर धन की कमी सम्पत्ति का अभाव नहीं होना चाहिए ? यह विचार क्या मनुष्य के जीवन को संरक्षित और प्रेरक बना सकेगा ।सब तरह के समझौते आदमी को करना चाहिए लेकिन सेहत का समझौता और स्वास्थ्य की अनदेखी बिलकुल नहीं करना चाहिए ।आज सूरज जिस तरह प्रदूषण के जाल में फंसा हुआ है और पर्याप्त ऊर्जा ,धूप ,रोशनी ,उष्मा के बिना धरती पर रोग बढ़ रहा है यह चिन्ता की बात है ।जिस दिन सूरज प्रदूषण मुक्त होकर धूप से भरा और रोशनी का जरिया बन जायेगा उस दिन मनुष्य के जीवन में चहक , किलकारियां समा जायेगी ।जन्म की खुशियां मनाई जाने लगेंगी ।बीज फलने – फूलने लगेंगे ।जीव मात्र खिलने लगेगा ।धरती फिर से जीवन के मंगल गीत गाने लगेगी ।क्या मनुष्य की चेतना इतनी करुणामयी , संवेदनशील, और कोमल भावुक सृजनात्मक हो सकेगी ? इन्हीं सवालों के साथ सूरज की रोशनी के पेड़ की छांव तले आदमी खड़ा है ,होना चाहता है ,और सूरज की रोशनी की छांव हर हमेशा बनी रहेगी । बस प्रदूषण के प्रति मनुष्य की निगाह बदले ,नजरिया बदले और बदले सेहत की बेहतरी की चिन्ता ? 🙏विनीता रघुवंशी

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