वह **** ( ६ ) वह सोचता कि जब खेल रहे हों बच्चे तब नहीं फोड़े जाने चाहिए बम बच्चों की किलकारियां सदा – सदा को कर देनी चाहिए निर्भय …
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April 2025
वह *** ( ५ ) इधर अपनी मेहरारु के साथ खेत नींदता वह उधर मेड़ की हरी दूब पर खेल रहे बच्चे तभी एक राकेट निकला धुएं की लकीर खींचता …
वह **** ( ४ ) चिलम का कंकर साफ करते हुए वह देखता है भर दुपहरिया में आट्या – पाट्या खेलते बच्चे कि जिनका संसार चिड़ियों की चहक जैसा तोड़ …
वह ***** ( ३ ) दिन भर अच्छा लगा हजार – हजार हाथों से दिल खोल कर रोशनी जो बांटी सूरज ने बहुत बुरा लगा उसे गांव के मंदिर का …
वह ***** ( २ ) खेत से लौटा तो उसने पो पोवन्ती में नहाने का सोचा वह नदी उसके गांव को शिवपुर बनाये ऋतुओं के संग – साथ आज भी …
वह **** ( १ ) दिन भर खेत – खलिहान में खुटते उसने सूरज को धमेड़ दिया मुंह लटकाये चला गया बापड़ा सांझ का उजास उस हट्टोट को लहलहाते खेतों …
मेरे देशजों ********* ( २ ) मैं तुम्हारे अंदर मातृशक्ति की मशाल थामे खड़ा हूं महसूस करो तुम्हें भी यह यक्ष उसकी उष्मा लग रही होगी इस मशाल को कहीं …
मेरे देशों ******* ( सुभाष संदर्भ ) ( १ ) मैं अनादि से ही तुम्हें रक्त के बदले आजादी देता आया हूं देशजों ! मैं वह अंगार हूं जो सदा …
