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April 2025

वह **** ( ४ ) चिलम का कंकर साफ करते हुए वह देखता है भर दुपहरिया में आट्या – पाट्या खेलते बच्चे कि जिनका संसार चिड़ियों की चहक जैसा तोड़ …

वह **** ( १ ) दिन भर खेत – खलिहान में खुटते उसने सूरज को धमेड़ दिया मुंह लटकाये चला गया बापड़ा सांझ का उजास उस हट्टोट को लहलहाते खेतों …

मेरे देशजों ********* ( २ ) मैं तुम्हारे अंदर मातृशक्ति की मशाल थामे खड़ा हूं महसूस करो तुम्हें भी यह यक्ष उसकी उष्मा लग रही होगी इस मशाल को कहीं …

मेरे देशों ******* ( सुभाष संदर्भ ) ( १ ) मैं अनादि से ही तुम्हें रक्त के बदले आजादी देता आया हूं देशजों ! मैं वह अंगार हूं जो सदा …

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