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April 2025

जब भी जलाती हो दिये ********************* ब भी जलाती हो दिये छा जाते हल बक्खर बनाते सुनील वसूला चलाते राधे स्मृति में कौंधने लगती बिनौले बोती लाखनौत की पसीना – …

वैसा ही निकल पड़ूं वहां ******************** खैर ! कचरा तो बुहारना ही है और लगाना है उन्हें भी सफाई में‌ एक हाथ में झाड़ू लिए पहुंचना है वहां जहां आपसी …

हमें ही परचानी होगी आग ********************* लोग हैं कि कानून बना मिटा रहे लोग हैं कि रेलों – बसों – यानों में आ – जा रहे लोग हैं कि कोठियों …

आजाद रोशनी ************* धूप तुम आई तो मेरी देह पसीने से महक उठी रोम – रोम से छलक पड़ा गुनगुना प्यार धीरे – धीरे उतरो उधर कच्चे मकानों से फैले …

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