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April 2024

इससे पहले ********** जो लिए हैं तुमने वे तुम्हारे निजी संकल्प है यह तुम सोचते हो वे अपने पांव चलकर हमारे घर आ गये हैं हम घर आये मेहमान का …

पहाड़ ****** दावानल के वक्त एक लम्बी लकीर की तरह सुलगने लगता है पहाड़ मेघों की झरी में झरनों ,नदियों -प्रपातों के संगीत में जुट जाता है पहाड़ ! सर्दी …

बागी ***** वे हत्याएं करके पहुंच जाते हैं बीहड़ों में पहाड़ उन्हें अपनी गोद में बिठाने से इंकार नहीं करता पिता की तरह मुआफ करता है उन्हे और मिटाता है …

गोष्ठियों और गालियों से परे ********************** विजय के विदिशा लौटने के बाद पत्थरों पर जिस इन्द्र धनुष को टूट कर बिखरते देखा था हमने आज भी तुम्हारी आंखों के सामने …

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