Home आज की कविता

आज की कविता

आज की कविता में आप नित्य रघुवंशीजी के द्वारा लिखी हुई रचनाओं के किसी एक भाग को पढ़ सकतें हैं और उन कविता कि विवेचना का अध्ययन कर सकते हैं .

Dr. Premshankar Raghuvanshi.

सांस्कृतिक हमला *************** आप चाहते हैं कि आपके मकान में चारों तरफ से हवा ,प्रकाश आते रहें तो मेहरबानी करके घर के आसपास प्राचीरे मत उठाइये खोले रखिए घर की …

गर्भगृह तक *********** हवा ने पेड़ों के कान में कुछ सुरसुराया और बजने लगे कछार और जोर थिरकने लगी नदी और फिसल चले लहरों के रुमाल हिलाते प्रपात कोसों दूर …

छोटी जगह ********** वैसे लिखने के लिए छोटी जगह ही चाहिए लेकिन बड़ा कठिन होता छोटी जगह में लिखना जहां न तो बालक होते न प्रेरक ,न सलाहकार होते हैं …

आलिंगन ********* गुनगुनी धूप ने छुआ तो पिघलता रहा देर तक और वह भी आहिस्ता आहिस्ता हमारी रही मुझमें एक दूजे की गंध में डूबी पसीना पसीना होती रही देह …

कहीं न कहीं *********** सड़कें सड़कों से छेड़छाड़ करती आड़ी तिरछी बलखाती राजमार्गों से जुड़ जातीं कहीं न कहीं पटरियां पटरियों से सन्नाती बोलती – बतियाती थर्राते हुए जंक्शनों से …

एक साथ ********* मैंने लिखनी चाही कविता उसी क्षण गोल में आ बैठी नन्हीं बिटिया कविता लिखने के क्षण वात्सल्य से भरे होते हैं कविता लिखते लिखते बेटी सयानी होगी …

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More