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आज की कविता

आज की कविता में आप नित्य रघुवंशीजी के द्वारा लिखी हुई रचनाओं के किसी एक भाग को पढ़ सकतें हैं और उन कविता कि विवेचना का अध्ययन कर सकते हैं .

Dr. Premshankar Raghuvanshi.

खरा होने के वास्ते (“मँजती धुलती पतीली“) ~~~~~~~~~~~~ जब आपसी संवाद से ज्यादा गप्पों में कटने लगे दिन तो समझ लो — ठहराव का एक पहाड़ खड़ा होने लगा है …

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