आज की कविता में आप नित्य रघुवंशीजी के द्वारा लिखी हुई रचनाओं के किसी एक भाग को पढ़ सकतें हैं और उन कविता कि विवेचना का अध्ययन कर सकते हैं .
खरा होने के वास्ते (“मँजती धुलती पतीली“) ~~~~~~~~~~~~ जब आपसी संवाद से ज्यादा गप्पों में कटने लगे दिन तो समझ लो — ठहराव का एक पहाड़ खड़ा होने लगा है …
