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आज की कविता

आज की कविता में आप नित्य रघुवंशीजी के द्वारा लिखी हुई रचनाओं के किसी एक भाग को पढ़ सकतें हैं और उन कविता कि विवेचना का अध्ययन कर सकते हैं .

Dr. Premshankar Raghuvanshi.

सूरज ****** मैंने आज सूरज को बदलिययों से छेड़छाड़ करते देखा मैंने आज सूरज को इन्द्रधनुष रचते देखा मैंने आज फिर से जाना कि सूरज के पास धूप ही नहीं …

शान है पानी *********** बिलाशक —- प्यासे का प्राण है पानी चमक है धरती की चेहरों का नूर भी बिलाशक —- थाली की दमक है पानी गमक है रोटी की …

ऐसे में कैसे ********** जुबानों पर कुण्डियाँ लगी है दस्तकें तक डूब जाती इस महाचुप्पी में ऐसे में कोई भी कैसे गा सकता कोई छन्द क्योंकि जब जुबानें बन्द हो …

हँसने के लिए ************ हँसने के लिए ढेर सारी चीजें नही चाहिए कुछ बेफिक्री ,कुछ उमंग कुछ आनंद और छाती भर आक्सीजन काफी है आक्सीजन ः जो हरे भरे पेडों …

बे मौसम बरसात *************** नदी की धार के नीचे चमकती बालू जितनी सुहानी लगती उतनी ही बुरी लगती घरों में घुसती रेत चूल्हे या अलाव की आग जितनी सुहानी लगती …

नदी -4 ******** फिर बोली नदी — मैं अब बारहों महीने बीमार हूँ मत छुओ ,छुओ मत मेरे गर्भ में फैक्टरियों का तेजाब पल रहा है मेरी इस हालत के …

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