आज की कविता में आप नित्य रघुवंशीजी के द्वारा लिखी हुई रचनाओं के किसी एक भाग को पढ़ सकतें हैं और उन कविता कि विवेचना का अध्ययन कर सकते हैं .
किसी एक दिन ************** शेर ! मेरे पास आ तुझे अपने पास पड़ी बकरे की पुरानी खाल उड़ा दूं इसे ओढ़ कर तू घास – पात पर मुंह तो मार …
