पिता की डायरी ************* ( २ ) मां ने किसी को भी नहीं कोसा आज तक इसलिए कि पिता की डायरी में कहीं भी नहीं टोका है किसी को भी …
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पिता की डायरी ************* ( १ ) मां ने जतन से रखी है पिता की डायरी चाहे जब एकान्त में फेरती उस पर हाथ ठीक उसी तरह जैसे कि — …
सांस्कृतिक हमला *************** आप चाहते हैं कि आपके मकान में चारों तरफ से हवा ,प्रकाश आते रहें तो मेहरबानी करके घर के आसपास प्राचीरे मत उठाइये खोले रखिए घर की …
गर्भगृह तक *********** हवा ने पेड़ों के कान में कुछ सुरसुराया और बजने लगे कछार और जोर थिरकने लगी नदी और फिसल चले लहरों के रुमाल हिलाते प्रपात कोसों दूर …
छोटी जगह ********** वैसे लिखने के लिए छोटी जगह ही चाहिए लेकिन बड़ा कठिन होता छोटी जगह में लिखना जहां न तो बालक होते न प्रेरक ,न सलाहकार होते हैं …
आलिंगन ********* गुनगुनी धूप ने छुआ तो पिघलता रहा देर तक और वह भी आहिस्ता आहिस्ता हमारी रही मुझमें एक दूजे की गंध में डूबी पसीना पसीना होती रही देह …
कहीं न कहीं *********** सड़कें सड़कों से छेड़छाड़ करती आड़ी तिरछी बलखाती राजमार्गों से जुड़ जातीं कहीं न कहीं पटरियां पटरियों से सन्नाती बोलती – बतियाती थर्राते हुए जंक्शनों से …
एक साथ ********* मैंने लिखनी चाही कविता उसी क्षण गोल में आ बैठी नन्हीं बिटिया कविता लिखने के क्षण वात्सल्य से भरे होते हैं कविता लिखते लिखते बेटी सयानी होगी …
