भूख का नाता ************** प्रदूषण के करिश्मे दिखाता जब भी सागर या नदियों को छेड़ता कोई मैं अन्दर तक छटपटा जाता मछली – सा मेरी भूख के लिए समाधान जो …
समस्त
मखौल उड़ाते लोगों से ******************** पसीने का तुम्हें जितना भी मखौल उड़ाना हो उड़ा दो लेकिन जिस वक्त कविता तुम्हें देखना शुरु करेगी वह तुम्हारी मौत तक शब्दों की लंबी …
बेटी का दूसर खत **************** पत्र के जवाब में बेटी ने ससुराल से लिखा है — तुम मुझे जीवन राग के वास्ते जो बातें लिखते हो वे मेरी समझ में …
बेटी का पहला ख़त ***************** बेटी ने लिखा है — बापू ! आंगन की मुट्ठी भर धूप भेज दो लिखा है थोड़ी – सी पत्तियां ही पड़ा दो बाड़े वाले …
जिनसे ****** जिनसे तंग आकर आत्महत्या तक पहुंची औरत वे भी अपनी पूरी सुरक्षा के बाद बचाने दौड़े उसे और जब भेजी गई लाश पोस्टमार्टम को तो लपककर चीलघर की …
मित्रवर ******* बहुत दिन हो गये न नदियों को हवा खाते देखा न पहाड़ों को पानी पीते न जंगलों को आग खुरचते न बीजों को माटी मिलते बहुत दिन हो …
जब ***** खिल गये धरती आकाश धूप के पैदा होते ही बजने लगे नगाड़े घटाओं के पानी के जनम पर कण कण हो गये गतिवान हवा के अवतरण पर धूप …
सम्मोहन उसका ************* उसके मुंह से भूख शब्द निकलते ही उसने उसे हिप्नोटाइज करके अचेत कर दिया फिर बोला — ‘जमूरे इधर आओ ‘ बोलो — ‘क्या चाहिए ‘ रोटी …
