Home नर्मदा की लहरों से

नर्मदा की लहरों से

आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस ************************ ( २ ) लेकिन इससे क्या होता है तू तो पैदा भर हुआ था उस दिन ठीक उसी तरह जिस तरह हुए थे तेरे …

आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस ************************ ( २ ) लेकिन इससे क्या होता है तू तो पैदा भर हुआ था उस दिन ठीक उसी तरह जिस तरह हुए थे तेरे …

आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस से ही ******************** ********** ( १ ) दुखते पांवों पर हथेलियां फेरती मां बीती रात के सपने सुनाने मेरे पास बैठी है कहती हैं —- …

आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस से ही ******************** ********** ( १ ) दुखते पांवों पर हथेलियां फेरती मां बीती रात के सपने सुनाने मेरे पास बैठी है कहती हैं —- …

भाषा ही होती हमारे बीच ********************* ( ९ ) लंबी कविता का अन्तिम अंश *********************** स्वयं में उलझा होता अकर्मक शब्द और सकर्मक जीवन को सार्थक करता रहस्यों के करीब …

भाषा ही होती हमारे बीच ********************* ( ८ ) देस देस कोस कोस की ध्वनि- धारों का नीर पीते पग – पग की बोली बानी का अन्न खाते स्वस्थ होते …

भाषा ही होती हमारे बीच ******************** ( ७ ) शब्द जब अर्थ यात्रा करते करते थक जाते हो जाते निढाल तो भाव-भंगिमाओं में प्रकट होते हो जाते नाट्य प्रवीण सूत्रधार …

भाषा ही होती हमारे बीच ******************** ( ६ ) जब भरोसेमंद होता — तब लिख दिया सो सही वक्त पर काम आए की पक्की इबारत होता शब्द अविश्वास पाकर पहुंचता …

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