Home नर्मदा की लहरों से

नर्मदा की लहरों से

कवि की खोज में भटकती कविता ********************** आश्वस्त होना चाहती कि मुझे — कुछ दूर ही सही जिंदगी के पास तो ले चलोगे कवि आश्वस्त होना चाहती कि मुझे — …

गाँव मेरा सिरहना है ***************** छन्नू दादा बताते रहे गाँव के हाल देर तक और लौटते हुए छोड़ गये फर्श पर पगथलियों के निशान जहाँ उभरने लगे खेत भरने लगी …

शान है पानी *********** बिलाशक —- प्यासे का प्राण है पानी चमक है धरती की चेहरों का नूर भी बिलाशक —- थाली की दमक है पानी गमक है रोटी की …

बे मौसम बरसात *************** नदी की धार के नीचे चमकती बालू जितनी सुहानी लगती उतनी ही बुरी लगती घरों में घुसती रेत चूल्हे या अलाव की आग जितनी सुहानी लगती …

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More