Home नर्मदा की लहरों से

नर्मदा की लहरों से

भाषा ही होती हमारे बीच ********************* ( ५ ) वृक्ष ने मरमर सरसर रचे और सूर्य की साक्षी में इन्हीं से बना ली प्राणदायी भाषा बिजलियों ने तड़ तड़ सागर …

भाषा ही होती हमारे बीच ******************** ( ४ ) अपनी ही जमीन पर खड़े शब्द जब आदमी की खोज को निकलते तो पगडंडी और राजमार्ग की सही पहचान करते विवेक …

भाषा ही होती हमारे बीच ******************** ( ३ ) शिरोरेखाओं पर झूलते स्वस्थ होते बुध्दि से कुशाग्र हैं शब्द वर्णों के आरक्षित वनों में व्याघ्र हैं शब्द उड़ान भरते पल्टियां …

भाषा ही होती हमारे बीच ******************** ( २ ) शब्द ब्रह्म होते ब्रह्म राक्षस भी शिखंडी – देवदत्त भी शून्य – शून्यकाल भी अवकाश – अनवकाश भी शत्रु – अजातशत्रु …

भाषा ही होती है हमारे बीच ********************** (१ ) पहाड़ों की छाती से फूटते झरनों की तरह बहते तारों की तरह टिमटिमाते आसमान की दहलीज पर और अरण्यों में चहकते …

नर्मदा की लहरों से ****************** रेवा से उठती लहरें यूं लगती मानों कोई ज्ञान पिपासु ब्रह्मचारिणी अपने लिखे हुए ग्रंथों के तेजी से पन्ने पलटाती —- गहन प्रसंगों वाले स्थल …

पृथ्वी पर उतरता पानी ****************** बिजली के अश्वों से जुते हवा के रथ पर सवार जब मेघमार्ग से पृथ्वी पर उतरता पानी तो मुरझाए चेहरों की उदासी अपने हाथों धोता …

पृथ्वी पर उतरता पानी ****************** बिजली के अश्वों से जुते हवा के रथ पर सवार जब मेघमार्ग से पृथ्वी पर उतरता पानी तो मुरझाए चेहरों की उदासी अपने हाथों धोता …

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