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आंगन बुहारते वक़्त

मिलावट ******** हां की पोटली खोली तो उसमें थोड़ी- सी ना भी निकली ना में इसी तरह पाई थोड़ी – सी हां अब कैसे विश्वास किया जाये कि अपने पास …

आत्मा की देह हैं चीजें ******************* इतनी सगी होती चीजें कि छूट जाने पर टूट जाते लोग मरने के बाद भी जीवित रखती चीजें पुरातत्व की तरह सदैव चीजों की …

बता देतीं पचास साल बाद गांव आया और लोगों से अपने घर का पता पूछ रहा गलियां होतीं तो भर भर धूल उछालती बता देतीं कूद -कूदकर । ( श्री …

अपने ही आयुधों से ****************** अपने आप मूक होता गालियां बकने वाला एक दिन एक दिन लुप्त हो चुकी होती वाणी उसकी पश्चाताप से भरी आंखों की भाषा ही बचती …

फौलाद की तरह ************** बाबा के बनाये घर को घर बनाये रखा पिता ने ता -उम्र कोशिश तो मैं भी करता रहा यही लेकिन बेटे ने मलवा तक बेंच दिया …

जब भी याद करता नर्मदा को ************************ मैंने तो मकर संक्रांति की शीतलहर में ठंड से कांपती नर्मदा को कुनकुनी रेत के अलावा पर बदन सेंकते देखा है घाट -घाट …

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