मां का चेहरा देखते हुए ******************* तेरी याद आते ही किलकारियां मारता शिशु हो जाता हूं बहुत दिनों बाद आज मोतिया बिन्दु से भरी आंखें और झुर्रियों भरा चेहरा देख …
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June 2025
इस जंगल से उस जंगल तक *********************** बांस उस वक्त खरा हो जाता है जब वह हर जगह से फुंगस जाता है नये कल्लो की धार लिए तब, अपने भिड़ों …
असलियत में फर्क नहीं पड़ता ************************ चांद , सूरज ,तारे , जो भी निकलते हैं झील उन्हें अपने भीतर उगा लेती है ये नक्षत्र और ग्रह थरथराती झील में अपने …
कमरे में ******** कितनी बार कर चुका हूं साफ पूरे करीने से जमाते हुए अपना सामान और सलवटें ठीक करते हुए बिस्तर की हर बार — न जाने किस धुन …
कीचड़ — सिधार —- जल कुम्भियां **************************** ( २ ) जो भी मरता उसे लाया जाता यहां इस नदी के घाट और सुला दिया जाता चिता पर जिसके धुएं और …
कीचड़ — सिधार —- जलकुम्भियां ***************************** ( १ ) इतना कीचड़ ! इतनी सिधार !! इतनी जलकुम्भियां !!! कि नदी का अस्तित्व ही मिट गया कल ही तो इसके कीचड़ …
मां से बातें करते हुए **************** मां ,तू मेरी तोतली बोली सुन कितनी मगन होती थी ! मेरे मुंह से मिट्टी की बिल्ली निकालते वक्त पूरा ब्रह्माण्ड ही देख लेती …
शहर की आधी रात **************** ट्रेन की सीटियों से चौंकता हुआ —और ऊंघती सड़कों पर दौड़ते हुएं तांगों की टप्प टप्प से कुचला –सुनसान –सन्नाटा ! सेकण्ड शो से छूटे …
