इन दिनों ******** कविता लिखना बहुत ही कठिन हो गया है इन दिनों इन दिनों कविता में जीना तो और भी कठिन है जब छीने जा रहे हों शब्दों के …
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February 2024
मित्र ! ****** मित्र ! देना ही चाहते हो तो प्यार दो और इतना दो कि दूसरी कोई गुंजाइश ही न रहे मित्र ! लेना ही चाहते हो तो प्यार …
समझना होगा ************* समझना ही होगा हां का अर्थ ना ना करते नहीं मिलेगा कुच्छ भी ना नदी ना किनारे ना कछार ना कोई टापू भी । ( श्री प्रेमशंकर …
बढ़ते और घटते हुए **************** मैं एक से दो तीन करता सैंकड़ों तक जाता रहा तुम सैकड़ों से निन्यानबे अनठान्बे करते एक पर आकर रुकते रहे मैं बढ़ते बढ़ते विराट …
अपनी हत्या का मनोरम दृश्य ************************ मैंने अहिंसा को उस वक्त हिंसा करते देखा जब वह अपने पक्ष में हाथ जोड़े शान्त भाव से वोट मांग रही थी जहां मतदाता …
धरती का मर्म कथन ***************** मेरी बेटियों ! तुम अकेली नहीं हो आपस में बोलो बतियाओं जरा ! बोलने बतियाने से जड़ता खतम होती है देखो, यह सूरज अकेला होकर …
कविता का सर्वनाम ***************** कविता रचते हुए नहीं होते कोई आलोचकीय विकार ना पाठ के वक्त —- काव्य भक्षियो के ख्याल मन में ना ही कविता पर बातें करते हुए …
पत्थर ****** पत्थर को जड़ समझने के पहले यह जानना भी जरुरी है कि — कितना कितना चेतन है वह!! ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —–” पहाड़ों …
