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कविता

कविता की खोज से बेखबर ************************ कविता की खोज में निकला ही था कि छींक दिया काली कुतिया ने भगाने के पहले वह ज़ख्म चाटती मच्छर मक्खियों से परेशान कूं …

घड़े बनाते कुम्हार के खयालो में *************************** घड़े बनाते कुम्हार के खयालों में उभरते तृप्त चेहरे चके पर साधी जा रही एक – एक गागर से छलक कर पल्लरें भरते …

हौंसले भरती है कविता ******************* ( ३ ) मेरी मां पालिन से यह कह देना कि बेंजामिन की कविताओं के एक एक शब्द उसके बेटे हैं दुनिया में जब जहां …

हौंसले भरती है कविता ******************* ( २ ) मानवीय मुक्ति के संकल्प में लगे दोस्तों ! मैं आ रहा हुं तुम्हारी शिराओं में सनसनी जैसा और जो सुर्ख झण्डा थामे …

हौंसले भरती है कविता ******************** ( विश्व की तमाम समाजवादी सरकारों की रिहाई की अपील के बावजूद दक्षिण अफ्रीका के जूझारु कवि बेंजामिन मोलाइस को वहां की सरकार ने 18 …

लेकिन आदमी है कि ******************* हर बार सिखाना चाहता प्यार का अर्थ लेकिन आदमी है कि जरा – सी गफलत में जानवरों से भी गया बीता हो जाता है । …

जब भी जलाती हो दिये ********************* ब भी जलाती हो दिये छा जाते हल बक्खर बनाते सुनील वसूला चलाते राधे स्मृति में कौंधने लगती बिनौले बोती लाखनौत की पसीना – …

वैसा ही निकल पड़ूं वहां ******************** खैर ! कचरा तो बुहारना ही है और लगाना है उन्हें भी सफाई में‌ एक हाथ में झाड़ू लिए पहुंचना है वहां जहां आपसी …

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