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कविता

जन -जन को —————— कई मर्तबा पीटा गया /पहली बार तब /जब मैं अपने गाँव जमानी की पाठशाला में /प्रभात फेरी के बाद /झण्डा गीत गाते हुए /खलिहान की जामुन …

इच्छा शक्ति—————-वे जिस चीज कोभी देखतेवही बनना चाहतेजबकिपेड़ के पास पहुँचकरपेड़नदी के पास पहुँचकरनदीखेत के पास पहुँचकरफसलचिड़िया के पास पहुँचकरचिड़ियाऔर आदमी के पास पहुँचकरआदमी नहीं बन सकेवे कुछ भी नहींबन …

खरा होने के वास्ते (“मँजती धुलती पतीली“) ~~~~~~~~~~~~ जब आपसी संवाद से ज्यादा गप्पों में कटने लगे दिन तो समझ लो — ठहराव का एक पहाड़ खड़ा होने लगा है …

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