सतपुड़ा ******** ( ३ ) शाम **** महुआ , तेंदू ,अचार हर्ष , बहेड़ा ,आंवला ,कचनार सागौन,साल , सलीम ,शीशम ,बांस कच्ची घास जामुन, बेरी ,करौंदा , आम इन सबकी …
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December 2024
सतपुड़ा ******* ( २ ) दोपहर ****** माथे पर सूरज के आते ही पहाड़ों के पांवों में सिमट चली छांव धूप की लहरों में तैर उठे पर्वतीय गांव जुट गया …
सतपुड़ा ******* (१ ) सुबह सीप ,घोंघे कितने ही रंगीन ,चमकदार पत्थर अपने बस्ते में भरे समाधिस्थ सतपुड़ा के सामने बालक सूर्य अपना रथ लिए रोज – रोज आता पक्षियों …
बच्चे ***** ( ३ ) मन्दिरों से — ‘मैं मूरख खल कामी ‘ की आरती के स्वर बस्ती के सहज व्यक्तित्व को करती है प्रसारित इसी बीच टनटनाती घण्टियों और …
बच्चे ***** ( २ ) बहकाने के लिए ************* बस्ती के बीचों बीच आमने -सामने मन्दिर दोनों के बीच पारायण चौक मैदान भी पुजारी की तरह कपाट बंद होते ही …
बच्चे ***** ( १ ) जब कभी आते हैं बच्चे एक सावधान पकड़ लिए तितलियों के पीछे दौड़े वे कलियों को फुसलाते हुए बाग किलकारियों से जाग उठे पौधों पर …
सूरज ***** ( ८ ) आज शाम होते – होते सूरज भागा- भागा आया पीछे की छत पर और बोला – – – यार तुम भी तो बदल गये तुम्हारी …
सूरज ******* ( ७ ) मैंने आज सूरज को बदलियों से छेड़-छाड़ करते देखा मैंने आज सूरज को इन्द्रधनुष रचते देखा मैंने आज फिर से जाना कि सूरज के पास …
