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December 2024

चौदह चित्र : कविताएं ******************* लगता है : ५ **************** एक गंध लगातार मेरी सांसों में समा रही है लगता है तुम्हारे भीतर निश्चय ही कोई शानदार चीज पकने लगी …

चौदह चित्र : कविताएं ******************* प्रणय स्वीकार -४ ******************* दर्पण जिसमें कभी गोल कभी लंबा और चपटा चेहरा दिखाई देता रहा आज , पूरा आकाश उतर आया उसमें । ( …

चौदह चित्र : कविताएं ******************** पतझर :३ *************** झर गये तमाम पात कंकाल वृक्षों की उभर आई एक – एक नस और रिक्तता में भर गया आकाश । ( श्री …

चौदह चित्र : कविताएं ****************** बरसात –२ **************** चू पड़ी नन्हीं बूंदें सिहर उठा तन बादल को देख – देख नाच उठा मन । ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के …

चौदह चित्र -कविताएं ******************* सागर —१ ************ लहर लहर लहर – – – मत कहीं ठहर ठहर ठहर ! (श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —-” तुम पूरी पृथ्वी …

वह बोला ******** ( ३ ) प्रगति ******* वह बोला अब तक जो चित्र बनाया है उसे पोत दो — मैं तुम्हें शानदार चित्र बनाना बताऊंगा यह सुनते ही मेहनत …

वह बोला : *************** अपना सुख ( १ ) *************** जनता के सामने वह समझा रहा था आनंद तत्व बोला — एक बार हम भेड़ाघाट गये रात का शांत वातावरण …

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