ऐसे में कैसे ********** ( २ ) दिन भर भटक कर लौटी चिड़ियां जब शाम को पनघट के उस पीपल पर फुदक – फुदक कर आती है तो ऐसे में …
Monthly Archives
October 2024
ऐसे में कैसे ********** ( १ ) जुबानों पर कुण्डियां लगी हैं दस्तकें तक डूब जाती इस महाचुप्पी में ऐसे में कोई भी कैसे गा सकता कोई छंद क्योंकि जब …
अन्तर ****** तुम में और मुझमें इतना सा अन्तर है कि तुम ्घड़ी से समय देखते हो और मैं उसकी टिक – टिक को भी आत्म सात करता हूं । …
नदी ***** ( ४ ) फिर बोली नदी —- मैं अब बारहों महीने बीमार हूं मत छुओ ,छुओ मत मेरे गर्भ में फैक्ट्रियों का तेजाब पल रहा है मेरी इस …
नदी **** ( ३ ) बोली नदी —- कोई न कोई लड़की जब – तब डूब जाती मेरे भीतर अंधेरे में सूरज का अहसास खोकर सुबह वह एक चर्चा बनती …
नदी **** ( २ ) नदी बोली — क्यों जीते हैं सारे समय फन फैलाये भुजंग मुझमें जबकि मुझे भी तो चाहिए विषहीन पर्यावरण जीने को एक – एक …
नदी **** ( १ ) पहले भी जाता था नदी शंख सीपियां बीनते खुद खिलौना बन जाता था उसका जब यही नदी नल की टोंटी में सुबह शाम समय का …
भरपूर अस्तित्व के लिए ******************* लावा की तह पर मलाई की जिल्द बांधें परिक्रमारत हो मैं सूर्य हूं और तुम मेरे ही जिस्म का एक हिस्सा हो धरती ! निरंतर …
