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October 2024

प्रेम **** ( ३ ) तुमने देखा और मैं आकाश हो गया एकदम तना हुआ । ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —” तुम पूरी पृथ्वी हो कविता“” …

प्रेम **** ( २ ) ओठों से फूट पड़ा झरना पपीहा पा गया तृप्ति । ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —-” तुम पूरी पृथ्वी हो कविता” से …

प्रेम **** ( १ ) नहीं होती कोई गली पगडण्डी या कि सड़क तो भी आऊंगा मुक्ताकाश पर रचते हुए इन्द्रधनुष । ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह …

भूगोल की दहलीज पर बैठा आदमी ***************************** कोरे तनाव को जीता आदमी बड़ा खतरनाक होता है खुद के लिए भी और यदि हो तो खुदा के लिए भी दिखाने में …

रोपते चलें वृक्षवंश प्यार के ********************** मेरे साथ चलना है तो सुनो ! अकेलेपन के अहसास में रचे हैं तुमने अब तक जो ख्यालों के पुलाव बुने हैं अब तक …

शब्दों का जरिया होते हुए भी ************************ अच्छी तरह जानने की कोशिश में है कविता कि कौन ,कब, कैसे , कहां जनता को बहलाता है बहकाता है कब – कब …

ऐसे में कैसे ********** ( ४ ) भेड़िए से मैं इसलिए नहीं डरता कि वह कुल मिलाकर भेड़िया है लेकिन मैं उनसे जरुर डरता हूं जो कुल मिलाकर न तो …

ऐसे में कैसे ********** ( ३ ) ऊंट चाहे जिस करवट बैठे रेगिस्तान में अच्छा लगता है जहां वह करवटें बदल बदल कर रेत के पहाड़ों से खुद को और …

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