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August 2024

उदित होती सहसस्राब्दी ******************** तय तो करने ही होंगे रहने के तरीके जीने की विधियां यह भी कि कैसे जाना है किधर तय तो करना ही होगा कि कहां कहां …

घाट पर सूनी पड़ी दो चप्पलें *********************** घाट पर सूनी पड़ी चप्पलें जिसके न होने का साक्ष्य दे रहीं वह तो जाने कब की बह चुकी होंगी नदी में ये …

गांव मेरा सिरहाना है ***************** छन्नू दादा बताते रहे गांव के हाल देर तक और लौटते हुए छोड़ गए फर्श पर पगथलियों के निशान जहां उभरने लगे खेत भरने लगी …

कोने में पड़ी बुहारी और मैं ********************** घर के एक कोने में पड़ी है बुहारी और मैं कविता लिखने की मन: स्थिति में हूं इस वक्त यहां कविवर त्रिलोचन होते …

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