अनिर्णय के इस दौर में ******************* मर्द समझ जिन्हें दिए जाते रहे समर्थन ज्यादातर हिजड़े निकले जो हिजड़े रहे उन्हें चुनकर बिठा दिया लोक भवनों में अनिर्णय के इस दौर …
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July 2024
जानना चाहा *********** जानना चाहा मछुआरे से नदी का हाल तो वह कंधों पर जाल लटकाए डोंगी पर सवार हो उतर गया नर्मदा में जानना चाहा बूढ़े वनवासी से सतपुड़ा …
ध्वनियों से ********* चिड़िया से चिड़िया गिलहरी से गिलहरी कहा तो एक फुर्र से उड़ गई और दूसरी सुरंजना के पेड़ पर जा छिपी यह देख झुंझलाता रहा खुद पर …
मां होने का अहसास **************** सूख रही तटों की नमी रेत की चमक क्या होगा तरबूज के बीजों का जो सुर्ख मिठास के सपने जी रहे सूख रही नदियों की …
कल्पवृक्ष ******* जल चरों से कुशल क्षेम पूछी तो सभी ने घेर लिया मुझे और एक स्वर में बोले ऐसा तो युगों से कभी पूछा ही नहीं किसी आदमी ने …
आश्वस्त होना चाहती मां ******************** आटा गूंथने को रखी परांत और युगों से गूंथी जा रही आंतें आश्वस्त होना चाहती मां कि कोई न कोई दे सके तृप्ति चकले पर …
क्या तब भी ********** पुल के नीचे बह रही अब भी नदी और लोग अब भी उसमें धंसने से कतराते हैं मोरियो में किलोलें कर रहे सांप और लोग —- …
तैयार ***** सुबह उठते ही पेड़ को देखा तो वह नहा – धोकर काम पर जाने को तैयार खड़ा था और दोपहरी में भरपेट डकारें ले रहा था शाम को …
