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July 2024

मां बनते ही लड़की *************** मां बनते ही लड़की क्षीर सिन्धु पर मेघ रचती किलकारियों की बारिश में नहाती है मां बनते ही लड़की ले आती अपने घर आकाश से …

कोयल कुहकी तो *************** कोयल कुहुकी तो साहब ने फरमान जारी किया कि कोयल को हिदायत दी जाए कि वह कार्यालयीन समय में नहीं कुहके और बाकी समय —– उनके …

दादाजी का चश्मा *************** (अंश —२ अन्तिम ) रात में भी गांव के कई नजारे देख लेते थे इससे दादाजी के चश्में में भरे हैं असंख्य पतझर और बसंत के …

दादाजी का चश्मा *************** ( अंश –१ ) रहल पर रखा दादाजी का चश्मा खींचता अपनी तरफ जबकि मेरे पास अपना चश्मा है जो सोने के अलावा हर वक्त — …

पैदा होता पानी ************ पानी जब ओस होता तो असंख्य आंखों वाली हो जाती दूब पानी जब बर्फ होता तो समाधिस्थ हो जाती घाटियां पानी जब बरस रहा होता तो …

आप हैं कि ********* कोई भाषा नहीं बच्चों के रोने मां का दूध पीने डकारने – खिलखिलाने की छींकने – जमुहाने सू – सू करने यहां तक कि किलकारियों की …

पानी जब ******** पानी जब जड़ों तक पहुंचता तो वनस्पतियों की पोर – पोर तक चमकता फूलों के रोम – रोम तक महकता गमकता फलों के रेशे- रेशे तक दमकता …

खुरपी चलाता माली ***************** खुरपी चलाता —- सरकता जाता माली और पीछे – पीछे पीकती जाती दूब पलटकर सोचता माली कि लौटेगा तब तक फिर से बिछ चुकी होंगी बाग …

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