तो *** सागर ने देखा मुझे तो वह —- पल्ल्रर पल्ल्रर उछलता रहा खुद में जब मैंने देखा उसे तो वह पल्ल्रर पल्ल्रर समाता गया मुझमें । ( श्री प्रेमशंकर …
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June 2024
पृथ्वी को ******* पृथ्वी को चाहिए पृथ्वी भर प्रार्थना पृथ्वी भर धूप हवा पानी पृथ्वी भर आकाश इस वक्त इस वक्त बदनभर हरी साड़ी जूड़े भर फूल कलाई भर नदियां …
तो वह ****** कली से कली कहा तो जोर से हंसी और फूल बनने को उतावली हो गई चाहा कि फूल से फूल कहूं तो वह —- फल के अंदर …
तक **** फूलों से कहा — अबकी तितली आएं तो पकड़ लेना कर लेना भौंरों को बन्द सुनते ही उदास हो गए फूल और शाम तक पांख पांख झर गए …
प्रणय स्वीकृति ************* दर्पण : जिसमें कभी गोल कभी लम्बा कभी चपटा दिखाई देता रहा चेहरा अब —- पूरा आकाश ही उतर आया है उसमें !! ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी …
धरती सृष्टि है *********** ( ३ ) धरती का नाम पता वल्दियत खुद धरती है दुनिया भर के रंग रुप वगैरह खुद धरती है जमाने भर की मिट्टी रेत पत्थर …
धरती सृष्टि है *********** ( २ ) धरती जब बजती तो पेट तक में गड़गड़ाहट भरती सारी की सारी हलचलें दब जाती अपने-आप उसकी आवाज के आगे धरती उफनकर लावा …
धरती सृष्टि है ********** ( १ ) धरती को धूप चाहिए धुआं नहीं धरती को हवा चाहिए बददुआ नहीं धरती को नीर चाहिए पीर नहीं धरती को आकाश चाहिए कंधों …
