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चौदह चित्र : कविताएं-तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

by Dr. Vinita Raghuvanshi
चौदह चित्र : कविताएं
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अन्तर : ८
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तुममें और मुझमें
इतना – सा अन्तर है
कि तुम
घड़ी से
समय देखते हो
और मैं
उसकी टिक टिक को भी
आत्मसात करता हूं ।
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —–” तुम पूरी पृथ्वी हो कविता ” से उद्धृत )
मनुष्य के जीवन में समय का ,काल का बहुत महत्व है । मनुष्य के, प्राणियों के, आसपास समय घूमता है और इस समय चक्र को ही मनुष्य गणना के आधार पर तीन कालों में विभाजित करता रहा है । भूत ,वर्तमान , और भविष्य इस समय के घेरे में चक्कर काटता मनुष्य समय का प्रबंधन करता रहता है । आज के युग में समय प्रबंधन पर बहुत ध्यान दिया जाता है ।टाईम मैनेजमेंट एक कोर्स है ,एक पाठ्यक्रम है और बड़े- बड़े शिक्षा संस्थान इसको सिखाने की ऊंची फीस भी वसूलते हैं । हमारी संस्कृति और सभ्यता इसकी शिक्षा बिना घड़ी की ईजाद हुए भी देती रही है । पौराणिक काल में समय को पल,पहर , घड़ी और मूहूर्त में बांटा गया । चौघड़िया की गणना इसी का प्रमाण है ।यह डेढ़ -डेढ़ घण्टे का काल माना जाता है ।इस तरह हर तीन घंटे के कुल चार चौघड़िया बराबर बारह घणंटे दिन के इसी तरह बारह घंटे रात्रि के गिने गये ।यह है पुरातन से चली आती समय का विभाजन ।जब से घड़ी का आविष्कार हुआ तब से मनुष्य की हर गतिविधि हर हलचल को घड़ी में दिखते समय की चाल से मापा जाता है । मनुष्य सेंकड,मिनिट, घण्टे से बंधा भाग रहा है ।वह हर जगह समय पर पहुंच जाना चाहता है किन्तु घड़ी के कांटे हर बार उससे तेज भागने लगते हैं ।वह पिछड़़ जाता है ।यह पहुंचने की ही भागम भाग नहीं वरन यह स्पर्धा है उपलब्धियों की , सफलता की ,प्राप्तियों की ,रोजगार की , आमदनी की , व्यवसाय की ,जीवन निर्वाह और संबंध निर्वाह के फैसलों की ।समय का प्रबंधन करना है समाज के अहम फैसलों को लेने के लिए ,समय प्रबंधन करना है आजीविका के लिए , समय प्रबंधन करना है आविष्कार के लिए ,चेतना के लिए । मनुष्य के हर गतिविधि में समय का टुकड़ा शामिल होता है । समय कोई यदि इसी तरह चूक जाता जाये तो वह जीवन में असफल ही होता जायेगा । बहुत जरुरी है कि मनुष्य अपनी चेतना को घड़ी की टिक टिक से न जोड़ कर चेतना से जोड़े तब उसे अलार्म की जरुरत नहीं रहेगी ।उसकी चेतना में बसी चिन्ता फिक्र ही उसे जागृत रखेगी हर समय ।आज का मनुष्य अपने आपको यंत्र मानव में बदल चुका है ।अब उसकी दीवारों पर घड़ियां नहीं टंगी है वह समय का निययंता बना समय को हाथ में लेकर घूम रहा है ।चेतना सम्पन्न व्यक्ति सचेत हैं समय के प्रति ,समय को महसूस कर रहा है , उसके भीतर ,आत्मा में समय की अनुभूति तरंग ले रही है । यह मनुष्य की सतर्क चेतना का प्रमाण है जो उसे समय का अनुभव कराता है ।जो व्यक्ति संवेदनशील है उसकी आत्मा हर समय वक्त के अहसास को महसूस करती रहती है । मशीन बना मनुष्य केवल घड़ी की टिक टिक को सुन समझ कर अनुशासित बना अपनी दिनचर्या का प्रबंधन करता रहता है ।वह व्यक्ति जो चेतना से जागृत है उसे टिक टिक की ध्वनि सुने बिना भी वह समय से पहले सक्रिय रहेगा ।यह है चेतना सम्पन्न और यंत्र मानव का अन्तर । यंत्र मानव समय होने पर सक्रिय होगा लेकिन चेतना से सजग मनुष्य वक्त का अनुमान करके पहले ही सावधान और सचेत होगा । मनुष्य की सतर्कता हर हमेशा अनुमान , समय-बोध,आत्म ज्ञान और आत्म मुक्ति की अनुभूति से प्रेरित होती है ।सजग मनुष्य को घड़ी में चलते समय के जागरण की जरुरत नहीं होती वह हर समय हर काल में आत्म चेतस बना जागृत ही रहता है । यही अन्तर है मशीन से बंधे मनुष्य और चेतना से जागे मनुष्य में यह हर पल को आत्मा में महसूस करता रहता है । यह समय से बाहर नहीं किया जा सकता लेकिन जो यंत्र चालित। जीवन गुजार रहा है वह घड़ी बंद होते ही समय से बाहर हो जाता है उसके पास समय का अनुभव और अनुमान करने की क्षमता क्षीण हो जाती है । इसलिए समय को हर क्षण आत्म सात करते रहना चाहिए ।यही समय प्रबंधन का सही तरीका है । 🙏विनीता रघुवंशी

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