Home आकार लेती यात्राएंआंगन-तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

आंगन-तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

by Dr. Vinita Raghuvanshi
आंगन
******
( २ )
उदास है आंगन
यह देख कि महज
आवाजाही के लिए
खोले जाते किवांड़
कोई संध तक नहीं
कि झांक कर देख सकें घर
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —- ” तुम पूरी पृथ्वी हो कविता” से उद्धृत )
आंगन घर का खुला हिस्सा है लेकिन उस पर भी दरवाजा लगा हुआ है ।समय बदल गया है ।पहले आंगन का मतलब होता था बिना दरवाजे का वह हिस्सा जहां गली मोहल्ले के देसी – परदेसी कोई भी अपनी थकान मिटाने को पल दो पल , अपनी गठरी के बोझ को उतार कर अपनी पीठ को आराम दें सकता था ,पोटरी में बंधी रोटियों को खा कर अपना पेट भर सकता था । लेकिन समय बदला और समाज में उठाई – गिरी का , उच्छृंखल माहौल का चलन हुआ तो लोगों ने अपने खुले आंगन को किवांड से ,गेट लगा कर ,या फड़की टोंग कर रोक और बंदिशें लगाना शुरु किया ।इस तरह आंगन की चहल – पहल और रौनक खतम हो गयी और घर- परिवार खास कर बहू – बेटियां इस रोक – टोक से उदास रहने लगी क्योंकि वे बाहर की मुख्य धारा से बिल्कुल अलग हो गयी ।मोहल्ले और गली की चहक का अन्दाज उनसे दूर हो गया ।वे अपने आस-पड़ोस से कट गयी । केवल घर के भीतर आने वालों की आहट और जाने वालों की पदचाप ही उनका सूनापन दूर करने वाली गतिविधि हो गई । यह आंगन का सूनापन खटकने वाला था ।बाहर की हलचल और चहक ,चिल्लपों से बिल्कुल अनजान और अजनबी बना आंगन सूनेपन से भर गया ।आंगन हर हमेशा अपने खुलेपन से संवाद ,बातचीत ,और ऊंची आवाजों को फ़ैलाने वाला रहा है । लेकिन जब से इमारतों , भवनों में आंगन तो बनाए गये लेकिन उन पर नियंत्रण के लिए गेट ,दरवाजा या फड़की लगाई जाने लगी तब से घर की बहू – बेटियों की ताक – झांक भी रुक गयी ।बड़े बड़े लोहे के गेट इसमें सबसे बड़ी अड़चन बन गये । जब बाहर गली मोहल्ले से सम्पर्क टूटा तो घर में उदासी और मायूसी ने अपना डेरा डाल लिया ।घर में खुली और ताजी हवा ,नये सम्पर्क और संबंधों से बनते – बिगड़ते रिश्तों को बनाने का माध्यम होते हैं आंगन ।समाज से संवाद बनाने का जरिया है आंगन ।आंगन संबंधों को बनाने का और टूटने का सहारा भी है । आंगन है तो घर की गर्मी – खुशी सबको वह अपने आंचल में समेटे लेता है ।आंगन घर का बेहद जरुरी हिस्सा है जो मानव मन को हमेशा आल्हाद और उदार बनाये रहता है ।हर घर में आंगन हो यही प्रसन्न मन की सौगात होती है ।
🙏विनीता रघुवंशी

You may also like

Leave a Comment

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More